Bajaj Housing Finance प्रमोटर बेचेंगे ₹1,577 करोड़ की हिस्सेदारी

By | December 2, 2025

Bajaj Housing Finance क्यों चर्चा में है?

पिछले दिनों Bajaj Finance ने घोषणा की कि वह Bajaj Housing Finance में अपनी हिस्सेदारी का एक हिस्सा बेचने जा रहा है — ताकि कंपनी सार्वजनिक शेयरहोल्डिंग (Minimum Public Shareholding, MPS) नियमों का पालन कर सके।
हालाँकि Bajaj Finance पहले कंपनी का बड़ा प्रमोटर था — लेकिन अब इस कदम से बाज़ार में हलचल आ गई है।

क्या हो रहा है: हिस्सेदारी बेचने का फैसला

  • Bajaj Finance अब Bajaj Housing Finance की कुल इक्विटी का लगभग 2 % तक बेचने की योजना बना रहा है — यानी करीब 16.66 करोड़ (166,600,000) शेयर।
  • इस प्रस्तावित हिस्सेदारी बिक्री की अवधि है 2 दिसंबर 2025 से 28 फरवरी 2026 तक, या जब तक सभी प्रस्तावित शेयर बिक न जाएँ।
  • Bajaj Finance ने यह स्पष्ट किया है कि जिस दिन हिस्सेदारी बेची जाएगी, उसी दिन प्रमोटर समूह अपने आप से कोई शेयर नहीं खरीदेगा।

शेयरों पर असर — कीमतों में गिरावट

  • इस कदम की घोषणा के बाद, Bajaj Housing Finance के शेयरों में तेजी से गिरावट आई — शेयर 9% तक नीचे गिरे।
  • ब्लॉक डील में करीब 2.35% हिस्सेदारी (लगभग ₹1,890 करोड़ मूल्य की) बेची गई, जिससे शेयरों में 52-सप्ताह के निचले स्तर तक गिरावट देखने को मिली।
  • इससे स्पष्ट है कि निवेशकों ने इस हिस्सेदारी बिक्री की योजना को नकारात्मक संकेत माना।

क्यों बेच रही है Bajaj Finance हिस्सेदारी?

  • इसका मुख्य कारण है — Minimum Public Shareholding (MPS) नियमों का पालन। किसी भी पब्लिक कंपनी में प्रमोटर और प्रमोटर-ग्रुप की हिस्सेदारी निश्चित स्तर से अधिक नहीं होनी चाहिए। Bajaj Housing Finance में यह बदलाव लाना जरुरी था।
  • इसके अलावा, इस हिस्सेदारी बिक्री से Bajaj Housing Finance का free-float बढ़ेगा — यानी, आम निवेशकों के लिए कंपनी के शेयरों तक पहुंच सुगम होगी।

इसके मायने — निवेशकों और कंपनी दोनों के लिए

निवेशकों के लिए

  • ज्यादा शेयर public domain में आयेंगे, जिससे liquidity बढ़ेगी।
  • अगर कंपनी fundamentals मजबूत रखेगी, तो long-term निवेशकों के लिए यह अवसर हो सकता है।

कंपनी और Bajaj Finance के लिए

  • MPS नियमों का पालन हो जाएगा।
  • कंपनी का public-float बेहतर होगा, जिससे बाजार में विश्वास बनी रह सकता है।
  • वित्तीय स्थिरता और पारदर्शिता की दिशा में कदम।

जोखिम और सावधानियाँ

  • इस तरह की बड़ी हिस्सेदारी बिक्री कई बार शेयर प्राइस में अस्थिरता (volatility) ला देती है — short-term निवेशकों को यह समझदारी से देखना होगा।
  • यदि बाजार की धारणा नकारात्मक बनी रही, तो शेयर की कीमत और नीचे भी जा सकती है।
  • निवेश से पहले कंपनी के loan-book, asset quality और broader macroeconomic हालत पर भी ध्यान देना चाहिए।

निष्कर्ष

Bajaj Housing Finance में Bajaj Finance द्वारा हिस्सेदारी कम करना — एक रणनीतिक कदम है, जो मुख्यतः सार्वजनिक शेयरहोल्डिंग नियमों का पालन सुनिश्चित करने के लिए उठाया गया है। हालांकि इस घोषणा ने शेयर में गिरावट जरूर लाई है, लेकिन यदि कंपनी fundamentals मजबूत रखती है, तो यह लंबी अवधि में निवेशकों के लिए अच्छा अवसर बन सकता है।

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