गूगल का Scam Protection (AI + Gemini Nano)

By | January 10, 2026
 Scam Protection

1. फीचर का टेक्निकल अवलोकन

Google का Real-Time Call Fraud Detection फीचर कॉल के दौरान ही संदिग्ध स्कैम पैटर्न को पहचान सकता है।

यह फीचर Gemini Nano पर आधारित है, जो Google का एक हल्का और ऑन-डिवाइस AI मॉडल है। इसे खास तौर पर स्मार्टफोन जैसे डिवाइस पर काम करने के लिए बनाया गया है।

  • कॉल के दौरान पूरा विश्लेषण फोन के अंदर ही होता है
  • कॉल का ऑडियो रिकॉर्ड नहीं किया जाता
  • कोई ट्रांसक्रिप्ट क्लाउड पर नहीं भेजी जाती

यह फीचर डिफ़ॉल्ट रूप से बंद रहता है और यूज़र को Phone App Settings में जाकर इसे खुद चालू करना होता है।

यह सिर्फ Unknown Numbers (जो आपके कॉन्टैक्ट्स में सेव नहीं हैं) पर काम करता है।

अगर कॉल के दौरान स्कैम जैसी बातचीत डिटेक्ट होती है, तो कॉल में बीप साउंड बजता है, ताकि दोनों पक्षों को पता चल सके कि स्कैम डिटेक्शन एक्टिव है।

शुरुआती रोलआउट में यह फीचर Pixel 9 और उसके बाद के मॉडल्स के लिए उपलब्ध है।

भाषा सीमा के तहत, फिलहाल यह फीचर केवल अंग्रेज़ी भाषा वाली कॉल्स पर ही अलर्ट दे सकता है।

2. स्क्रीन-शेयर स्कैम से सुरक्षा

Google ने उन स्कैम मामलों को भी ध्यान में रखा है, जहाँ स्कैमर कॉल के दौरान यूज़र से स्क्रीन शेयर करने को कहता है, ताकि OTP, PIN या बैंकिंग ऐप्स तक पहुंच बनाई जा सके।

इसके लिए Google ने Screen Sharing Alert फीचर पेश किया है।

अगर कॉल के दौरान स्क्रीन शेयर चालू है और उसी समय यूज़र
Google Pay,
Paytm
या Navi जैसे फाइनेंशियल ऐप खोलता है,
तो स्क्रीन पर एक साफ और बड़ा चेतावनी अलर्ट दिखता है।

इस अलर्ट में एक सीधा विकल्प होता है:
“End Call + Stop Sharing”
जिससे यूज़र तुरंत कॉल बंद कर सकता है और स्क्रीन-शेयरिंग रोक सकता है।

यह फीचर Android 11 या उससे ऊपर वाले डिवाइस पर काम करता है।

3. Enhanced Phone Number Verification (ePNV)

Google ने SMS-OTP पर निर्भरता कम करने के लिए ePNV (Enhanced Phone Number Verification) नाम का नया वेरिफिकेशन सिस्टम पेश किया है।

यह सिस्टम SIM-आधारित है, यानी वेरिफिकेशन सीधे आपके सिम कार्ड से होता है।

इसके फायदे:

  • OTP फ्रॉड की संभावना कम
  • स्कैमर द्वारा OTP मंगवाने और गलत इस्तेमाल की ट्रिक्स पर रोक
  • ज्यादा सुरक्षित और ऑटोमैटिक वेरिफिकेशन

4.प्राइवेसी और डेटा सुरक्षा

Google ने इस फीचर में प्राइवेसी को सबसे ऊपर रखा है।

  • कॉल डेटा क्लाउड पर नहीं जाता
  • ऑडियो या टेक्स्ट स्टोर नहीं किया जाता
  • पूरा प्रोसेस फोन के अंदर होता है
  • फीचर पूरी तरह Opt-in है (यूज़र के कंट्रोल में)

इसका मतलब यह है कि आपकी निजी बातचीत कहीं सेव या ट्रैक नहीं होती।


5. सीमाएँ, चुनौतियाँ और संभावित जोखिम

इस फीचर के साथ कुछ सीमाएँ भी हैं:

  • भाषा प्रतिबंध: अभी सिर्फ इंग्लिश कॉल्स पर काम करता है
  • डिवाइस लिमिटेशन: फिलहाल केवल Pixel 9 सीरीज़
  • Opt-in ज़रूरी: सेटिंग में ऑन न किया जाए तो फीचर एक्टिव नहीं होगा
  • गलत अलर्ट की संभावना: कुछ मामलों में वैध कॉल्स पर भी स्कैम चेतावनी दिख सकती है
  • हर स्कैम को नहीं पकड़ सकता: नए या बहुत एडवांस सोशल-इंजीनियरिंग स्कैम इससे बच सकते हैं
  • कानूनी सवाल: AI द्वारा कॉल कंटेंट एनालिसिस को लेकर कुछ विशेषज्ञ कानूनी पहलुओं पर सवाल उठा रहे हैं

रिपोर्ट्स के मुताबिक Google भविष्य में इस फीचर को अन्य Android ब्रांड्स तक भी लाने की योजना बना रहा है, लेकिन फिलहाल कोई स्पष्ट टाइमलाइन नहीं है।

निष्कर्ष

यह फीचर पूरी तरह वास्तविक है और Google ने इसे भारत में लॉन्च भी कर दिया है।

यह AI-आधारित सुरक्षा लेयर:

  • स्कैम कॉल्स
  • स्क्रीन-शेयर फ्रॉड
  • OTP-आधारित धोखाधड़ी

तीनों से लड़ने की कोशिश करती है।

हालांकि यह कोई 100% परफेक्ट समाधान नहीं है, फिर भी यह डिजिटल फ्रॉड के खिलाफ Google का अब तक का सबसे मजबूत कदम माना जा सकता है — खासकर उन यूज़र्स के लिए जो रोज़ अनजान नंबरों से कॉल्स का सामना करते हैं।

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