
National Apprenticeship Promotion Scheme-2 (NAPS-2)
भारत सरकार ने युवाओं को व्यावहारिक कौशल से सशक्त बनाने और उद्योगों को प्रशिक्षित कार्यबल उपलब्ध कराने के उद्देश्य से National Apprenticeship Promotion Scheme-2 (NAPS-2) शुरू की है। आज के प्रतिस्पर्धी रोज़गार बाज़ार में केवल डिग्री पर्याप्त नहीं है, बल्कि वास्तविक कार्य अनुभव भी उतना ही आवश्यक है। यही कारण है कि NAPS-2 छात्रों और युवाओं को उद्योगों से जोड़कर उन्हें नौकरी के लिए तैयार करने में अहम भूमिका निभा रही है।
यह योजना छात्रों द्वारा सीखी गई सैद्धांतिक जानकारी और उद्योगों की वास्तविक आवश्यकताओं के बीच की दूरी को कम करने के लिए बनाई गई है।
NAPS-2 क्या है? (What is NAPS-2)
National Apprenticeship Promotion Scheme-2 एक सरकारी कार्यक्रम है जो विभिन्न उद्योगों में शिक्षुता (Apprenticeship) प्रशिक्षण को बढ़ावा देता है। इस योजना के अंतर्गत कंपनियों को प्रशिक्षुओं को रखने के लिए वित्तीय सहायता दी जाती है, जिससे युवाओं को औपचारिक शिक्षा के साथ-साथ व्यावहारिक अनुभव भी मिलता है। यह योजना NAPS के पहले चरण की सफलता पर आधारित है और इसमें प्रक्रियाओं को और सरल व डिजिटल बनाया गया है।
NAPS-2 के उद्देश्य (Objectives of NAPS-2)
इस योजना का उद्देश्य वास्तविक कार्य वातावरण में प्रशिक्षण देकर युवाओं के कौशल का विकास करना है। नियोक्ताओं को वित्तीय सहायता देकर प्रशिक्षुओं को नियुक्त करने के लिए प्रेरित करना, युवाओं की रोज़गार संभावनाओं को बेहतर बनाना और शिक्षा व उद्योग के बीच मजबूत संबंध स्थापित करना भी इसके मुख्य लक्ष्य हैं।
NAPS-2 की मुख्य विशेषताएं (Key Features)
NAPS-2 के अंतर्गत सरकार प्रशिक्षुओं को दिए जाने वाले वजीफे का एक हिस्सा वहन करती है, जिससे कंपनियों पर आर्थिक बोझ कम होता है। प्रशिक्षण National Skill Qualification Framework (NSQF) के अनुसार होता है, जिससे यह सुनिश्चित होता है कि प्रशिक्षण उद्योग की जरूरतों के अनुरूप है। पूरी प्रक्रिया डिजिटल और पारदर्शी है, जिसमें एक समर्पित पोर्टल के माध्यम से पंजीकरण, ट्रैकिंग और भुगतान की सुविधा दी जाती है। इस योजना में MSMEs, बड़ी कंपनियों और सार्वजनिक क्षेत्र के संगठनों की भागीदारी को भी प्रोत्साहित किया जाता है।
NAPS-2 के लाभ (Benefits of NAPS-2)
प्रशिक्षुओं के लिए लाभ
प्रशिक्षु सीखते समय वास्तविक उद्योग अनुभव प्राप्त करते हैं। उन्हें पूरे प्रशिक्षण काल में वजीफा मिलता है। इससे नौकरी पाने की संभावना बढ़ती है और करियर में आगे बढ़ने के बेहतर अवसर मिलते हैं। उन्हें NSQF के अंतर्गत राष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त कौशल प्रमाणन भी मिलता है।
नियोक्ताओं के लिए लाभ
नियोक्ताओं को प्रशिक्षित और कुशल कार्यबल मिलता है। वित्तीय सहायता से प्रशिक्षण खर्च कम होता है। वे प्रशिक्षुओं को भविष्य के कर्मचारियों के रूप में तैयार कर सकते हैं और भारत के कौशल विकास मिशन में योगदान दे सकते हैं।
NAPS-2 के लिए पात्रता (Eligibility)
प्रशिक्षुओं के लिए
न्यूनतम आयु 14 वर्ष होनी चाहिए, जबकि खतरनाक कार्यों के लिए 18 वर्ष आवश्यक है। चयनित ट्रेड के अनुसार शैक्षणिक योग्यता होनी चाहिए। यह योजना नए उम्मीदवारों, ITI पास, डिप्लोमा और डिग्री धारकों के लिए खुली है। उसी ट्रेड में पहले से प्रशिक्षुता की हुई नहीं होनी चाहिए।
नियोक्ताओं के लिए
प्रतिष्ठान को Apprenticeship Portal पर पंजीकृत होना चाहिए। प्रशिक्षण की पर्याप्त सुविधाएं उपलब्ध होनी चाहिए। Apprentices Act, 1961 का पालन करना अनिवार्य है। वे प्रशिक्षुओं के लिए वजीफा प्रतिपूर्ति के पात्र होते हैं।
NAPS-2 का महत्व (Importance of NAPS-2)
भारत दुनिया के सबसे युवा देशों में से एक है। ऐसे में रोजगार सृजन के लिए कौशल विकास और उद्योगों की भागीदारी दोनों जरूरी हैं। NAPS-2 युवाओं को उद्योगों से जोड़कर उन्हें रोजगार के लिए तैयार करता है और कंपनियों को कुशल श्रमिक उपलब्ध कराता है। यह योजना कार्यबल की गुणवत्ता बढ़ाकर देश की अर्थव्यवस्था को भी मजबूत करती है।
अंतिम विचार (Final Thoughts)
National Apprenticeship Promotion Scheme-2 केवल एक सरकारी योजना नहीं है, बल्कि यह एक कुशल, आत्मनिर्भर और भविष्य के लिए तैयार भारत बनाने की दिशा में बड़ा कदम है। व्यावहारिक प्रशिक्षण, उद्योग सहयोग और वित्तीय सहायता के माध्यम से NAPS-2 युवाओं के करियर को नई दिशा देता है और भारत के स्किल डेवलपमेंट मिशन को मजबूती प्रदान करता है।
यदि आप अपने करियर की शुरुआत करना चाहते हैं और वास्तविक उद्योग अनुभव प्राप्त करना चाहते हैं, तो NAPS-2 आपके लिए एक बेहतरीन अवसर है।
For More Info Click This Link https://www.myscheme.gov.in/schemes/naps
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