
Health Ministers Discretionary Grant क्या है ?
भारत जैसे विशाल देश में स्वास्थ्य सेवाओं की पहुँच और सामर्थ्य हमेशा से एक बड़ी चुनौती रही है। विशेष रूप से कैंसर, हृदय रोग और अंग प्रत्यारोपण जैसी गंभीर बीमारियाँ न केवल शारीरिक कष्ट देती हैं, बल्कि मध्यम और निम्न आय वर्ग के परिवारों को आर्थिक रूप से तबाह कर देती हैं। इसी समस्या के समाधान हेतु भारत सरकार का स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय “स्वास्थ्य मंत्री विवेकाधीन अनुदान (Health Minister’s Discretionary Grant – HMDG)” योजना संचालित करता है।
वर्ष 2026 में इस योजना को “डिजिटल हेल्थ मिशन” के साथ एकीकृत कर पहले से कहीं अधिक पारदर्शी और त्वरित बनाया गया है। आइए, इस योजना के हर पहलू को विस्तार से समझते हैं।
1. योजना का परिचय और 2026 का विजन
HMDG एक केंद्रीय योजना है जो सीधे भारत के स्वास्थ्य मंत्री के विवेक पर आधारित वित्तीय सहायता प्रदान करती है। 2026 में इस योजना का मुख्य विजन “अंत्योदय स्वास्थ्य” है, जिसका अर्थ है समाज के अंतिम व्यक्ति तक सर्वोत्तम चिकित्सा सहायता पहुँचाना। जहाँ आयुष्मान भारत (PM-JAY) एक बीमा-आधारित मॉडल है, वहीं HMDG उन विशिष्ट और दुर्लभ मामलों में ‘इमरजेंसी ग्रांट’ के रूप में काम करता है जहाँ तत्काल वित्तीय हस्तक्षेप की आवश्यकता होती है।
2. योजना की मुख्य विशेषताएँ (Key Specialities 2026)
2026 के नए संशोधनों के बाद, इस योजना में निम्नलिखित विशिष्टताएँ शामिल की गई हैं:
- गंभीर बीमारियों पर ध्यान: यह ग्रांट मुख्य रूप से उन रोगों के लिए है जिनका इलाज लंबे समय तक चलता है और अत्यधिक खर्चीला होता है।
- पारदर्शिता और जवाबदेही: 2026 में “ई-हेल्थ ग्रांट पोर्टल” के माध्यम से भ्रष्टाचार की संभावना को शून्य कर दिया गया है। राशि सीधे अस्पताल के बैंक खाते में हस्तांतरित की जाती है।
- समतावादी दृष्टिकोण: यह योजना जाति, धर्म या क्षेत्र के भेदभाव के बिना केवल आर्थिक पिछड़ेपन और बीमारी की गंभीरता को आधार मानती है।
3. पात्रता मानदंड 2026 (Detailed Eligibility)
2026 में आवेदकों के लिए पात्रता की शर्तें इस प्रकार निर्धारित की गई हैं:
- नागरिकता: आवेदक का भारत का मूल निवासी होना अनिवार्य है।
- आय सीमा (संशोधित 2026): परिवार की कुल वार्षिक आय ₹1,50,000 से अधिक नहीं होनी चाहिए। (पूर्व में यह सीमा ₹1 लाख थी, जिसे चिकित्सा महंगाई को देखते हुए बढ़ाया गया है)।
- अस्पताल का प्रकार: इलाज केवल सरकारी अस्पतालों (जैसे AIIMS, सफदरजंग, या राज्य के मेडिकल कॉलेज) या सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त विशिष्ट संस्थानों में ही होना चाहिए।
- अन्य योजनाओं से लाभ: यदि मरीज पहले से आयुष्मान भारत या किसी राज्य स्वास्थ्य योजना का लाभ ले चुका है और उसकी सीमा समाप्त हो गई है, तो वह शेष राशि के लिए पात्र हो सकता है।
4. सहायता राशि का विवरण (Financial Benefits structure)
2026 के नए दिशा-निर्देशों के अनुसार, सहायता राशि को निम्नलिखित स्लैब में विभाजित किया गया है:
| उपचार की अनुमानित लागत | वित्तीय सहायता की मात्रा |
| ₹1,00,000 तक | लागत का 50% (अधिकतम ₹50,000) |
| ₹1,00,001 से ₹1,50,000 | ₹75,000 तक |
| ₹1,50,000 से अधिक | केस की गंभीरता पर निर्भर (अधिकतम ₹1.25 लाख) |
विशेष परिस्थितियों में और स्वास्थ्य मंत्री की विशेष अनुमति से, अत्यंत दुर्लभ और जीवन-रक्षक सर्जरी के लिए इस सीमा को संशोधित किया जा सकता है।
5. आवेदन प्रक्रिया: डिजिटल स्टेप-बाय-स्टेप (Process in 2026)
2026 में आवेदन की प्रक्रिया को पूरी तरह पेपरलेस बनाया गया है:
- अनुमान प्रमाण पत्र प्राप्त करना: जिस अस्पताल में मरीज भर्ती है, वहां के संबंधित विभाग के डॉक्टर से ‘एस्टीमेट सर्टिफिकेट’ और ‘डायग्नोसिस रिपोर्ट’ लें।
- सांसद की अनुशंसा (Mandatory Recommendation): आवेदन पत्र पर अपने क्षेत्र के लोकसभा या राज्यसभा सांसद (MP) के हस्ताक्षर और मोहर लगवाना अनिवार्य है। 2026 में सांसद अब सीधे अपने ‘डिजिटल सिग्नेचर’ के माध्यम से ऑनलाइन पोर्टल पर भी अनुशंसा भेज सकते हैं।
- दस्तावेज़ अपलोड करना: मंत्रालय के एकीकृत पोर्टल पर निम्नलिखित स्कैन कॉपी अपलोड करें:
- आय प्रमाण पत्र (Income Certificate)
- राशन कार्ड या बीपीएल प्रमाण
- आधार कार्ड (KYC हेतु)
- डॉक्टर द्वारा हस्ताक्षरित मेडिकल रिपोर्ट
- स्क्रीनिंग कमेटी की समीक्षा: स्वास्थ्य मंत्रालय की एक उच्च-स्तरीय कमेटी आवेदन की जांच करती है। 2026 में “तत्काल सहायता” (Instant Aid) के तहत 10 दिनों के भीतर समीक्षा पूरी करने का लक्ष्य रखा गया है।
- राशि का हस्तांतरण: स्वीकृति के बाद, सहायता राशि सीधे अस्पताल के रिवॉल्विंग फंड या बैंक खाते में जमा कर दी जाती है।
6. कवर की जाने वाली प्रमुख बीमारियाँ
इस अनुदान के तहत केवल जीवन-रक्षक और गंभीर बीमारियों को शामिल किया गया है:
- हृदय रोग: पेसमेकर, वाल्व रिप्लेसमेंट, और बाईपास सर्जरी।
- कैंसर: कीमोथेरेपी, रेडियोथेरेपी और कैंसर से संबंधित सर्जरी।
- अंग प्रत्यारोपण: किडनी, लिवर और बोन मैरो ट्रांसप्लांट।
- न्यूरोसर्जरी: मस्तिष्क ट्यूमर और स्पाइनल इंजरी के ऑपरेशन।
- दुर्लभ रोग: आनुवंशिक बीमारियाँ जिनका इलाज अत्यधिक महंगा है।
7. 2026 की चुनौतियाँ और सरकार के नए समाधान
योजना के क्रियान्वयन में कुछ चुनौतियाँ भी रही हैं, जिन्हें 2026 में सरकार ने निम्नलिखित तरीकों से सुलझाने का प्रयास किया है:
- जागरूकता का अभाव: अब ग्रामीण क्षेत्रों में ‘आरोग्य मित्रों’ को प्रशिक्षित किया गया है जो मरीजों को HMDG के बारे में जानकारी देते हैं।
- प्रक्रिया में देरी: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का उपयोग करके दस्तावेज़ों के सत्यापन की गति को 3 गुना बढ़ा दिया गया है।
- अस्पतालों की सीमा: अब अधिक से अधिक जिला अस्पतालों को इस नेटवर्क से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है ताकि मरीजों को दिल्ली न भागना पड़े।
8. अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ 2026)
प्रश्न 1: क्या यह पैसा मरीज के निजी बैंक खाते में आ सकता है? उत्तर: नहीं। पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए यह राशि सीधे इलाज कर रहे सरकारी अस्पताल को भेजी जाती है।
प्रश्न 2: यदि इलाज शुरू हो चुका है और बिलों का भुगतान कर दिया गया है, तो क्या रिफंड मिल सकता है? उत्तर: नहीं। HMDG केवल ‘चल रहे इलाज’ या ‘भविष्य में होने वाले ऑपरेशन’ के लिए अग्रिम सहायता प्रदान करता है।
प्रश्न 3: आवेदन अस्वीकार होने का मुख्य कारण क्या होता है? उत्तर: अधूरी मेडिकल रिपोर्ट, आय प्रमाण पत्र का पुराना होना, या अस्पताल का गैर-मान्यता प्राप्त होना सबसे प्रमुख कारण हैं।
9. निष्कर्ष (Conclusion)
Health Minister’s Discretionary Grant (HMDG) 2026 भारत सरकार की उस संवेदनशीलता का प्रतीक है जो यह मानती है कि “स्वास्थ्य सेवा पर अमीर-गरीब सबका समान अधिकार है।” यह योजना उन लाखों परिवारों के लिए एक वरदान है जो इलाज के खर्च के कारण कर्ज के दलदल में फंस जाते हैं। 2026 में इसकी डिजिटल पहुँच और आय सीमा में वृद्धि ने इसे अधिक जन-केंद्रित बनाया है। यदि आपके आसपास कोई ऐसा व्यक्ति है जिसे महंगे इलाज की जरूरत है, तो उसे इस योजना के बारे में बताकर आप उसकी जान बचाने में मदद कर सकते हैं।
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