Scheme for Adolescent Girls 2026

By | January 30, 2026
Scheme for Adolescent Girls

Scheme for Adolescent Girls क्या है ?

आज के आधुनिक युग में भी ग्रामीण और पिछड़े क्षेत्रों में किशोरियों का स्वास्थ्य और शिक्षा एक बड़ी चुनौती बनी हुई है। भारत सरकार के महिला एवं बाल विकास मंत्रालय द्वारा संचालित Scheme for Adolescent Girls (SAG), जिसे अब पोषण 2.0 के तहत एकीकृत किया गया है, 2026 में एक नए स्वरूप में हमारे सामने है। यह योजना 11 से 18 वर्ष की उन लड़कियों के जीवन में क्रांतिकारी बदलाव ला रही है जो किसी कारणवश अपनी स्कूली शिक्षा पूरी नहीं कर पाईं।

1. योजना का परिचय और 2026 का स्वरूप

इस योजना की नींव 2010 में “सबल” के रूप में रखी गई थी, लेकिन 2026 में इसका लक्ष्य केवल भोजन देना नहीं, बल्कि किशोरियों को डिजिटल रूप से साक्षर और आर्थिक रूप से स्वतंत्र बनाना है। वर्तमान में यह योजना देश के सभी आकांक्षी जिलों (Aspirational Districts) और पूर्वोत्तर राज्यों में प्राथमिकता के साथ लागू की जा रही है।

2. प्रमुख उद्देश्य (Core Objectives 2026)

2026 के अपडेटेड विजन के अनुसार, योजना के चार मुख्य स्तंभ हैं:

  • पोषण सुरक्षा (Nutritional Security): रक्ताल्पता (Anemia) को जड़ से खत्म करना और कुपोषण को दूर करना।
  • शिक्षा की वापसी (Back to School): स्कूल छोड़ चुकी लड़कियों को फिर से औपचारिक या अनौपचारिक शिक्षा से जोड़ना।
  • डिजिटल और जीवन कौशल: कंप्यूटर साक्षरता, मोबाइल बैंकिंग और आत्मरक्षा (Self-Defense) जैसे कौशल सिखाना।
  • स्वास्थ्य जागरूकता: मासिक धर्म स्वच्छता (Menstrual Hygiene) और प्रजनन स्वास्थ्य के प्रति वैज्ञानिक दृष्टिकोण विकसित करना।

3. पात्रता और लाभार्थी (Eligibility 2026)

वर्ष 2026 में पात्रता के नियमों को अधिक स्पष्ट बनाया गया है:

  • आयु वर्ग: 11 से 18 वर्ष की किशोरियाँ।
  • श्रेणी: मुख्य रूप से वे लड़कियाँ जो स्कूल नहीं जा रही हैं (Out-of-School Girls)।
  • आधार अनिवार्यता: अब लाभार्थियों का ‘पोषण ट्रैकर’ (Poshan Tracker) ऐप पर आधार के माध्यम से पंजीकृत होना अनिवार्य है ताकि लाभ सीधे और पारदर्शी तरीके से मिल सके।

4. प्रदान की जाने वाली सेवाएँ (Key Services)

2026 में सेवाओं के दायरे को व्यापक बनाया गया है:

क. पोषण सहायता (Nutrition Support)

प्रत्येक लाभार्थी को वर्ष में कम से कम 300 दिन पूरक पोषण आहार (THR – Take Home Ration) या गर्म पका हुआ भोजन मिलता है।

  • कैलोरी: प्रतिदिन 600 कैलोरी।
  • प्रोटीन: 18-20 ग्राम प्रोटीन।
  • सूक्ष्म पोषक तत्व: आयरन, फोलिक एसिड और विटामिन-सी की गोलियाँ (IFA Tablets)।

ख. गैर-पोषण घटक (Non-Nutrition Component)

यह वह क्षेत्र है जहाँ 2026 में सबसे अधिक सुधार हुआ है:

  • स्वास्थ्य जाँच: हर तीन महीने में आंगनवाड़ी केंद्रों पर स्वास्थ्य कैंप और वजन की निगरानी।
  • कौशल विकास: प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना (PMKVY) के सहयोग से सिलाई, डिजिटल मार्केटिंग और हस्तशिल्प का प्रशिक्षण।
  • सार्वजनिक सेवाओं का परिचय: बैंक, पोस्ट ऑफिस और पुलिस स्टेशन की कार्यप्रणाली को समझना ताकि लड़कियाँ आत्मनिर्भर बन सकें।

5. डिजिटल कार्यान्वयन: पोषण ट्रैकर और डैशबोर्ड

2026 में योजना की सबसे बड़ी विशेषता इसका डिजिटल ढांचा है।

  • Real-time Monitoring: आंगनवाड़ी कार्यकर्ता प्रत्येक किशोरी के डेटा को ‘पोषण ट्रैकर’ ऐप पर अपडेट करती हैं।
  • Direct Benefit Transfer (DBT): कौशल विकास के लिए मिलने वाली वित्तीय सहायता सीधे बैंक खाते में भेजी जाती है।
  • Smart Anganwadi: अब कई केंद्रों को ‘सक्षम आंगनवाड़ी’ में बदल दिया गया है, जहाँ ऑडियो-विजुअल माध्यम से स्वास्थ्य शिक्षा दी जाती है।

6. चुनौतियाँ और समाधान (Challenges & Modern Solutions)

चुनौतियाँ:

  • सामाजिक रूढ़िवादिता: कई क्षेत्रों में आज भी मासिक धर्म और प्रजनन स्वास्थ्य पर बात करना वर्जित माना जाता है।
  • पलायन: काम की तलाश में परिवारों का पलायन होने से किशोरियों का डेटा ट्रैक करना मुश्किल होता है।
  • डिजिटल डिवाइड: ग्रामीण क्षेत्रों में इंटरनेट और स्मार्टफोन की कमी।

2.0 समाधान (2026 Strategy):

  • कम्युनिटी रेडियो और सोशल मीडिया: स्थानीय भाषाओं में जागरूकता अभियान चलाना।
  • मोबाइल वैन: दूर-दराज के क्षेत्रों के लिए ‘पोषण वैन’ का उपयोग।
  • युवा साथी: उन्हीं के आयु वर्ग की शिक्षित लड़कियों को ‘पियर एजुकेटर’ (Peer Educator) के रूप में नियुक्त करना।

7. आवेदन प्रक्रिया (Application Process 2026)

अब आवेदन प्रक्रिया को बहुत ही सरल बना दिया गया है:

  1. पंजीकरण: किशोरी या उसके अभिभावक को नजदीकी आंगनवाड़ी केंद्र (AWC) जाना होगा।
  2. दस्तावेज़: आधार कार्ड, एक पासपोर्ट साइज फोटो और यदि उपलब्ध हो तो बैंक पासबुक की कॉपी।
  3. ई-केवाईसी: आंगनवाड़ी कार्यकर्ता आधार के माध्यम से ई-केवाईसी (e-KYC) पूरा करेंगी।
  4. सत्यापन: नाम ‘पोषण ट्रैकर’ पोर्टल पर दर्ज होते ही लाभ मिलना शुरू हो जाएगा।

8. अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ 2026)

प्रश्न 1: क्या स्कूल जाने वाली लड़कियाँ भी इस योजना का लाभ ले सकती हैं? उत्तर: 2026 के नियमों के अनुसार, प्राथमिकता स्कूल छोड़ चुकी (Out-of-school) लड़कियों को दी जाती है। हालांकि, स्वास्थ्य शिक्षा और IFA गोलियों जैसी सुविधाएँ सभी के लिए उपलब्ध हैं।

प्रश्न 2: क्या यह योजना पूरे भारत में उपलब्ध है? उत्तर: हाँ, यह केंद्र प्रायोजित योजना है और भारत के सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में प्रभावी है।

प्रश्न 3: क्या व्यावसायिक प्रशिक्षण के लिए कोई फीस देनी होती है? उत्तर: नहीं, इस योजना के तहत दिया जाने वाला सभी प्रकार का प्रशिक्षण और शिक्षा पूरी तरह निःशुल्क है।

निष्कर्ष (Conclusion)

Scheme for Adolescent Girls (SAG) 2026 भारत की आधी आबादी के उज्ज्वल भविष्य की नींव है। यह योजना केवल कुपोषण से नहीं लड़ रही, बल्कि किशोरियों के आत्मविश्वास को जगाकर उन्हें देश की अर्थव्यवस्था में भागीदार बना रही है। जब एक किशोरी शिक्षित और स्वस्थ होती है, तो वह एक पूरे परिवार और समाज को सशक्त बनाती है। 2026 का लक्ष्य “स्वस्थ किशोरी, सशक्त भारत” को साकार करना है।

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