Rashtriya Arogya Nidhi 2026, गंभीर बीमारियों में आर्थिक सहारा

By | January 30, 2026
Rashtriya Arogya Nidhi

1. Rashtriya Arogya Nidhi

Rashtriya Arogya Nidhi (RAN) भारत सरकार द्वारा गरीब मरीजों को जानलेवा बीमारियों के इलाज राष्ट्रीय आरोग्य निधि (RAN) के अंतर्गत स्वास्थ्य मंत्री कैंसर रोगी कोष (HMCPF) 2026 में कैंसर से जूझ रहे गरीब परिवारों के लिए एक अभूतपूर्व जीवनरक्षक बन चुका है। 2026 के नए डिजिटल नियमों और बढ़ी हुई सहायता राशि के साथ, यहाँ इस योजना का 900 शब्दों में विस्तृत और अपडेटेड विवरण दिया गया है।

राष्ट्रीय आरोग्य निधि (RAN): स्वास्थ्य मंत्री कैंसर रोगी कोष (HMCPF) 2026

कैंसर एक ऐसी बीमारी है जिसका नाम सुनते ही न केवल शारीरिक कष्ट बल्कि आर्थिक तबाही का डर भी सामने आता है। भारत सरकार ने इस गंभीर स्थिति को समझते हुए राष्ट्रीय आरोग्य निधि (Rashtriya Arogya Nidhi) के तहत स्वास्थ्य मंत्री कैंसर रोगी कोष (Health Minister’s Cancer Patient Fund – HMCPF) को 2026 में और भी अधिक सुदृढ़ बनाया है। इसका मुख्य लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि पैसे की कमी के कारण किसी भी भारतीय नागरिक की जान न जाए।

1. योजना का परिचय (Overview 2026)

HMCPF एक केंद्रीय क्षेत्र की योजना है जो उन कैंसर रोगियों को वित्तीय सहायता प्रदान करती है जो गरीबी रेखा से नीचे (BPL) जीवन यापन कर रहे हैं। 2026 में, इस योजना को ‘आयुष्मान भारत’ (PM-JAY) के साथ इस तरह एकीकृत किया गया है कि जो रोगी आयुष्मान भारत की सीमा (₹5 लाख) से बाहर के महंगे इलाज की आवश्यकता रखते हैं, वे इस कोष से लाभ उठा सकें।

2. प्रमुख उद्देश्य (Objectives of HMCPF 2026)

  • महंगे इलाज की सुलभता: कीमोथेरेपी, रेडियोथेरेपी और जटिल कैंसर सर्जरी के लिए तत्काल धन उपलब्ध कराना।
  • शून्य वित्तीय तनाव: गरीब परिवारों को इलाज के लिए कर्ज लेने या संपत्ति बेचने से बचाना।
  • समय पर उपचार: 2026 में शुरू किए गए डिजिटल ‘ग्रीन चैनल’ के माध्यम से आवेदन के 15 दिनों के भीतर राशि स्वीकृत करना।
  • विशिष्ट देखभाल: देश के शीर्ष सरकारी चिकित्सा संस्थानों (जैसे AIIMS) में कैंसर के उन्नत उपचार की पहुंच सुनिश्चित करना।

3. पात्रता मानदंड 2026 (Eligibility Criteria)

इस वर्ष पात्रता के नियमों में कुछ महत्वपूर्ण स्पष्टीकरण दिए गए हैं:

  • वित्तीय स्थिति: आवेदक का परिवार गरीबी रेखा से नीचे (BPL) होना चाहिए या उसकी वार्षिक आय राज्य/केंद्र सरकार द्वारा निर्धारित सीमा (वर्तमान में लगभग ₹1.25 लाख से ₹1.5 लाख तक, राज्य अनुसार) के भीतर होनी चाहिए।
  • बीमारी: सहायता केवल और केवल कैंसर (Cancer) के निदान और उपचार के लिए मान्य है।
  • अस्पताल: इलाज अनिवार्य रूप से सरकार द्वारा सूचीबद्ध क्षेत्रीय कैंसर केंद्रों (RCC), AIIMS, या सरकारी मेडिकल कॉलेजों में होना चाहिए।
  • किसे लाभ नहीं मिलेगा?
    • केंद्र/राज्य सरकार के कर्मचारी या पेंशनभोगी।
    • वे लोग जो पहले से ही किसी अन्य सरकारी स्वास्थ्य बीमा योजना (जो कैंसर कवर करती है) का पूरा लाभ ले चुके हैं।

4. वित्तीय सहायता की राशि (Financial Assistance Limit 2026)

2026 में चिकित्सा लागत बढ़ने के कारण सहायता के ढांचे को संशोधित किया गया है:

  • एकमुश्त सहायता: आमतौर पर इलाज की अनुमानित लागत के आधार पर ₹2 लाख से ₹15 लाख तक की सहायता दी जा सकती है।
  • अस्पताल का अधिकार: सरकारी अस्पतालों के चिकित्सा अधीक्षकों (MS) को अब ₹5 लाख तक की राशि सीधे स्वीकृत करने का अधिकार दिया गया है ताकि आपात स्थिति में दिल्ली (मंत्रालय) से मंजूरी का इंतजार न करना पड़े।
  • भुगतान का तरीका: स्वीकृत राशि कभी भी रोगी को नकद नहीं दी जाती; यह सीधे उस सरकारी अस्पताल के खाते में भेजी जाती है जहाँ उपचार चल रहा है।

5. आवेदन प्रक्रिया: डिजिटल और सरल (How to Apply in 2026)

2026 में आवेदन की प्रक्रिया अब पूरी तरह ऑनलाइन (Online Portal) और अस्पताल-आधारित है:

चरण-वार प्रक्रिया:

  1. परामर्श और अनुमान: सबसे पहले सूचीबद्ध सरकारी अस्पताल के संबंधित डॉक्टर से इलाज का ‘अनुमानित खर्च प्रमाण पत्र’ (Estimate Certificate) प्राप्त करें।
  2. दस्तावेज़ एकत्रीकरण: निम्नलिखित कागजात तैयार रखें:
    • आय प्रमाण पत्र/BPL कार्ड/राशन कार्ड।
    • आधार कार्ड (Direct Benefit Transfer के लिए अनिवार्य)।
    • कैंसर रिपोर्ट (Biopsy/Histopathology)।
    • पासपोर्ट साइज फोटो।
  3. आवेदन जमा करना: अस्पताल में स्थित Medical Social Service Unit या ‘आरोग्य मित्र’ काउंटर पर जाएँ। वे आपके आवेदन को ऑनलाइन पोर्टल पर अपलोड करेंगे।
  4. सत्यापन और स्वीकृति: अस्पताल का चिकित्सा अधीक्षक आवेदन को सत्यापित करेगा। ₹5 लाख से ऊपर के मामलों में, फ़ाइल स्वास्थ्य मंत्रालय (MoHFW) को भेजी जाएगी।
  5. फंड ट्रांसफर: स्वीकृति मिलते ही फंड अस्पताल के रिवॉल्विंग फंड में जमा हो जाता है और उपचार शुरू हो जाता है।

6. सूची में शामिल प्रमुख संस्थान (Network Hospitals)

2026 में इस कोष के तहत 27 क्षेत्रीय कैंसर केंद्रों (RCC) और सभी AIIMS को जोड़ा गया है, जिनमें प्रमुख हैं:

  • AIIMS (नई दिल्ली, भोपाल, ऋषिकेश, पटना, जोधपुर आदि)।
  • टाटा मेमोरियल अस्पताल (मुंबई)।
  • PGIMER (चंडीगढ़)।
  • JIPMER (पुडुचेरी)।
  • चितरंजन राष्ट्रीय कैंसर संस्थान (कोलकाता)।
  • राजीव गांधी कैंसर संस्थान (नई दिल्ली – केवल सरकारी संदर्भ पर)।

7. 2026 में नई चुनौतियाँ और समाधान

चुनौती: कैंसर का इलाज लंबा चलता है और कई बार फंड बीच में खत्म हो जाता है। समाधान (2026): अब ‘रिवॉल्विंग फंड’ (Revolving Fund) की व्यवस्था की गई है, जिससे अस्पताल जरूरत पड़ने पर फंड की पुन:पूर्ति (Top-up) के लिए तत्काल अनुरोध भेज सकते हैं।

चुनौती: जागरूकता की कमी। समाधान: 2026 में सरकार ने ‘कैंसर सहायता ऐप’ लॉन्च किया है, जो रोगियों को उनके आवेदन की स्थिति (Live Status) ट्रैक करने की सुविधा देता है।

8. अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ 2026)

प्रश्न 1: क्या निजी अस्पताल में इलाज के लिए पैसा मिल सकता है? उत्तर: नहीं, HMCPF केवल सरकारी और सरकार द्वारा सूचीबद्ध क्षेत्रीय कैंसर केंद्रों में इलाज के लिए ही मान्य है।

प्रश्न 2: यदि मेरे पास आयुष्मान कार्ड है, तो क्या मैं RAN का लाभ ले सकता हूँ? उत्तर: हाँ, यदि आपके कैंसर के इलाज का खर्च आयुष्मान भारत की ₹5 लाख की सीमा को पार कर जाता है, तो आप शेष राशि के लिए RAN/HMCPF के तहत आवेदन कर सकते हैं।

प्रश्न 3: क्या दवाइयों का खर्च इसमें शामिल है? उत्तर: हाँ, अस्पताल में भर्ती रहने के दौरान दी जाने वाली कीमोथेरेपी और अन्य जीवनरक्षक दवाइयां इसमें शामिल हैं।

9. निष्कर्ष (Conclusion)

राष्ट्रीय आरोग्य निधि (RAN) का कैंसर रोगी कोष केवल एक सरकारी योजना नहीं, बल्कि उन हजारों परिवारों की आखिरी उम्मीद है जो बीमारी और गरीबी के दोहरे जाल में फँसे हैं। 2026 में इसके डिजिटल सुदृढ़ीकरण ने बिचौलियों की भूमिका खत्म कर दी है और राहत की राशि को सीधे अस्पताल तक पहुँचाना सुनिश्चित किया है। यदि सही समय पर सही दस्तावेज़ों के साथ आवेदन किया जाए, तो कैंसर जैसी बीमारी भी गरीबी के सामने बाधा नहीं बन पाएगी।

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